Thursday, December 30, 2010

गुजरे साल के नाम.....


गुजरा एक साल,आया एक और साल,

ना जाने क्या बदलेगा,तेरा और मेरा I

अजीब सी हरकतों में गुजरा ये साल,

अजीब सी हसरतो में गुजरेगा ये साल,

ना जाने क्या बदलेगा,मेरा और तेरा I

उतने ही दिन लिए, उतनी ही रात,

उतने ही लिए दर्द, उतनी ही उदास शाम,

ना जाने क्या बदलेगा, तेरा और मेरा I

ख्वाबों का रंग बदलेगा,या किताबों से प्यार,

नींद को सपना मिलेगा, या ख्वाब को रात,

ना जाने क्या बदलेगा,मेरा और तेरा I


बदले तो ये जहां बदले,गरीबों की शाम बदले,

लाल बती पर ठंड में ठिठुरते बच्चों के लिबास बदले,

मैक-डी के बर्गर भले ना बदले,उस जमादार के घर खाना जरुर बदले,

सरकार-नेता ना बदले ,कम से कम ये हिंद तो बदले,

फिर बदले में भले ही ,कुछ ना बदले तेरा और मेरा !

-शुभ

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