गुजरा एक साल,आया एक और साल,
ना जाने क्या बदलेगा,तेरा और मेरा I
अजीब सी हरकतों में गुजरा ये साल,
अजीब सी हसरतो में गुजरेगा ये साल,
ना जाने क्या बदलेगा,मेरा और तेरा I
उतने ही दिन लिए, उतनी ही रात,
उतने ही लिए दर्द, उतनी ही उदास शाम,
ना जाने क्या बदलेगा, तेरा और मेरा I
ख्वाबों का रंग बदलेगा,या किताबों से प्यार,
नींद को सपना मिलेगा, या ख्वाब को रात,
ना जाने क्या बदलेगा,मेरा और तेरा I
बदले तो ये जहां बदले,गरीबों की शाम बदले,
लाल बती पर ठंड में ठिठुरते बच्चों के लिबास बदले,
मैक-डी के बर्गर भले ना बदले,उस जमादार के घर खाना जरुर बदले,
सरकार-नेता ना बदले ,कम से कम ये हिंद तो बदले,
फिर बदले में भले ही ,कुछ ना बदले तेरा और मेरा !
-शुभ
bhut khoob
ReplyDeletevery nice dost
heart touching........
bhaiya.... bahut mast........ likha hai
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