मजदूर हो, बनना सीखों l
कीड़े हो, कुचले जाना सीखों l
तुम्हारे जैसे सब नौकर पाले है हमने,
उन्ही के हाथों की लकीर तुम्हारी है, समझना सीखों l
खून तुम्हारा पैदा होते ही पनीला था,
उबाल आ नहीं सकता,
गुस्सा दिखाना मत सीखों l
त्योरियाँ चढ़ जाती हैं,
उंगलियां उठ जाती हैं,
इसलिए मन का मौजी बनना मत सीखों l
सच के नाम पर फरेब बेचतीं दुनिया,
साथ हो लिए तो नौकर,
नहीं तो कुत्ते की मौत मरना सीखों l
क्या तुम नया करने चले हो,
हर चीज तो मुक़मल है,
बस हमारे पीछे आना सीखों l
वो दौर गए जब लोग “लपट” हुआ करते थे,
अब चिंगारी बन के बुझना सीखों l
दुष्यंत के शेरों को पढ़ना नहीं,
साहिर कि बातों को समझना नहीं,
बस हमारे फेसलो कि इबारत करना सीखों l
तुम्हारी तामीर है मजदूर बनना,
फडफडाना छोडो,
मालिकों की कद्र करना सीखों l
ऐसी क्या उड़ान भरना चाहते हो तुम,
अपने आस-पास तो देखो,
अपने दोस्तों की तरह हम्माली करना सीखों l
कुछ ही तो लाशें पड़ी है,
कुछ ही तो बेवाए रोई है,
दुनिया खूबसूरत हैं,इसे खूबसूरत समझना सीखों l
ये लिखो मत ,
वो पढ़ो मत ,
आँख-कान बंद कर के जीना है कैसे, ये सीखों l
ये मत कहो,
वो मत बोलो ,
बेहतर है मुह ना खोलो ,
ये है गाँधी के आज के बन्दर ,इन्ही को समझना सीखों l
फूलों की तरह सुनहरे सपनो को कुचलना सीखों l
कुछ बदलने की ख्वाहिश रखना, छोड़ना सीखों l
मातम के बीच भी खुश रहना सीखों l
दिल में कोई नया ख्याल आये तो झट से उसे दबाना सीखों l